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पांच माह में निकाले गये 132 गर्भाशय, सीएमओ की जांच में हुआ खुलासा

रायगढ़। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पिछले दिनों रूपये के लिए मरीजों के गर्भ निकालने का मामला सामने आया था। रायगढ़ जिले में भी जब गर्भाशय निकालने काले प्रकरणों की जांच की गयी तो चौकाने वाले तथ्य सामने आये हैं। स्वास्थ्य विभाग की इस जांच मेें पिछले पांच माह के दौरान 132 गर्भाशय निजी नर्सिंग होमों में निकाले गये हैं तो क्या रायगढ़ जिले में भी कोख के गुनहगार हैं ? यह मामला सूक्ष्म जांच का विषय है क्योंकि रायपुर की तर्ज पर आपरेशन फीस के लालच में न सही मगर स्मार्ट कार्ड की राशि का बेजा फायदा उठाने से यह मामला जुड़ा हो सकता है। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश की राजधानी रायपुर में पिछले दिनों कोख के गुनहगारों का मामला अखबारों और इलेक्ट्रानिक चैनलों की सुर्खियां बना था। यहां गर्भ निकालने के कई मामलों में गर्भ निकालने के ऐसे लगभग दो दर्जन मामले सामने आये थे जिनमें निजी नर्सिंग होम के संचालकों व डाक्टरों द्वारा बिना जरूरत के गर्भाशयच निकाल लिये गये थे। यह पूरा मामला राष्ट्रीय स्तर पर गुंजने के साथ-साथ स्वास्थ्य संचालनालय भी सजग हुआ और संचालनालय द्वारा प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र लिखकर गर्भ निकालने के पांच माह के आंकड़े मंगाये गये थे। इसी दिशा निर्देश के तहत जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी हबेल उरांव ने जिले भर में संचालित नर्सिंग होम्स के पांच माह के आंकड़े इकट्ठे किये और पूरा फिगर आने के बाद इसकी संख्या देखकर स्वास्थ्य विभाग के भी कान खड़े हो गये हैं। इन आंकड़ों के अनुसार कुल 132 महिलाओं के गर्भाशय निकाले गये हैं जिनमेंं एक 13 साल की बच्ची का नाम भी शामिल है। डाक्टरों के अनुसार इस बच्ची के गर्भाशय में प्राकृतिक परेशानी आने के कारण उसके परिजनों की अनुमति से गर्भाशय निकालने का निर्णय लिया गया वहीं सूत्र बताते हैं कि इस आंकड़े में 85 फीसदी संख्या ऐसी महिलाओं की है जो स्मार्ट कार्डधारी है और बीपीएल परिवार के निर्धन लोग हैं। चूंकि इन बीपीएल परिवार से जुड़े लोगों को शासन की स्मार्ट कार्ड योजना के तहत वर्ष भर में 30 हजार रूपये की चिकित्सकीय सुविधा मुहैया कराने का प्रावधान है इसलिए यह सारा खेल स्मार्ट कार्ड का लाभ लेने के लिए भी रचा गया हो सकता है और इसकी भी संभावना है कि संबंधित मरीज व उसके परिजन की अनुमति के बगैर भी नर्सिंग होम संचालक या डाक्टरोंद्वारा बीमारी का भय दिखाकर आपरेशन कर दिया गया हो या योजना का लाभ लेने के लिए केवल कागजों पर ही गर्भाशय निकालने की खानापूर्ति कर ली गयी हो। बरहाल मामला जो भी हो इस आंकड़े के आने के बाद इस पूरे मामले की सूक्ष्म जांच जरूरी हो गयी है।